मंगलनाथ मंदिर
मंगल की जन्मभूमि उज्जैन मानी जाती है। स्कंदपुराण एवं मत्स्यपुराण के अनुसार मंगल गृह की उत्पत्ति यहीं से हुई है। सम्भवतः प्राचीनकाल में मंगल गृह यहाँ से निकट से देखा जाता था। अध्यन के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान रहा होगा।
मंगलवार, सोमवती अमावस्या, एवं वैशाख मास में यहाँ दर्शनार्थ हजारों यात्री आते है। मंगल की पूजा एवं आराधना ‘मंगलो भूमि पुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः‘ के अनुसार ऋण निवारण एवं धन प्राप्ति के लिए भी की जाती है।
मंगल ग्रह की जन्मभूमि है उज्जयिनी
धरणीगर्भ सम्भूतं विधुतक्रांति समप्रभं।कुमार शक्ति हसतं च मंगल प्रणमाम्यहं।।
पुराणों के अनुसार उज्जैन (अवंतिका नगरी) में शिप्रा नदी के तट पर स्थित मंगलनाथ मंदिर मंगल ग्रह का जन्म स्थान है।
पौराणिकता के आधार पर मंगलनाथ शिव का ही रूप है। अंधकासूर नामक दैत्य को जब वरदान मिला कि उसका कोई वध नहीं कर सकता, यदि कोई भी इंसान देवी या देव उस राक्षस का वध करने का सहास करेंगे तो उसका रक्त धरती पर गिरते ही उसके समान लाखों दैत्य पैदा कर देगा। जब इस राक्षस को मारने में सभी देवता असमर्थ रहे तब वे शिव से बोले हे शिव आपने ही इस राक्षस को वरदान दिया है, आप ही इसका वध करें। सभी देवी-देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने उस अंधकासूर नामक राक्षस से युद्ध किया। इस युद्ध के दौरान भगवान शिव के पसीने की बूंद जब धरती पर गिरी तभी धरती फटी और बालक रूप में भगवान मंगल की उत्पत्ति हुई। मंगलनाथ भगवान ने उस राक्षस का सारा रक्त पिया और उस अंधकासूर राक्षस का संहार किया। सभी देवी-देवताओं ने इसी धरती पर भगवान मंगल को शिवलिंग के रूप में विराजमान कर उनका दूध, दही, पंचामृत से स्नान कराया और भात (चावल) से प्रथम बार उनकी पूजन की और उन्हें शांत किया और सभी देवगणों ने कहा कि है, मंगलदेव इस स्थान से सभी का मंगल कीजि।
जिस किसी भी जातक को मंगल से संबंधित परेशानिया कुंडली में आती है वे भात का पूजन कर उसे दूर करते है। मंगलनाथ नवग्रह में मंगल ग्रह का जन्म स्थान है। मेष और वश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। मंगल नाथ मंदिर पृथ्वी के भूमध्य स्थल पर स्थित है एवं कर्क रेखा मंदिर के शिखर के ठीक ऊपर से गुजरती है।
उज्जैन नगरी को मंगल की जन्मभूमि कहा जाता है। ऐसे जातक जिनकी कुंडली में मंगल भारी रहता है, वे अपने अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए यहाँ पूजा-पाठ करवाने आते है। यूँ तो देश में मंगल भगवान के कई मंदिर है, लेकिन उज्जैन इनका जन्मस्थान होने के कारण यहाँ की पूजा को खास महत्व दिया जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर सदियों पुराना है। सिंधिया राजघराने में इसका पुनर्निर्माण करवाया गया था। उज्जैन शहर को भगवान महाकाल की नगरी कहा जाता है, इसलिए यहाँ मंगलनाथ भगवान की शिवलिंग रूप का पूजन किया जाता है।
हर मंगलवार के दिन इस मंदिर में श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। मंगलनाथ मंदिर भगवान शिव का रूप है। मत्स्य पुराण में शिलालेख के अनुसार मंगलनाथ मंगल ग्रह का जन्मस्थान है। मंगलनाथ मंदिर एक दर्शनीय एवं रमणीय स्थान है। यह शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। एक अद्भुत शहर के जीवन की बाढ़ से दूर स्थित मंदिर, शांति की एक अकल्पनीय पर्यटकों को समझ प्रदान करता है। मंदिर जगह पर स्थित है जहां मध्याह्न के लिए पृथ्वी को पारित करने के लिए कहा जाता है और इसलिए इस जगह ग्रह की एक स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए एक प्रसिद्ध जगह थी और फलस्वरूप यह खगोलीय अध्ययन के लिए एक उपयुक्त जगह हो गया।
मत्स्यपुराण में लिखा है कि - आवंत्या च कुजो जातो मगधे चहि माशूनः
इसी प्रकार कर्मकाण्डों और संकल्पों में भी - अवन्तिदेशोद्भवभौमः
